मेरा बचपन बहुत अच्छा नहीं बीता मेरी माँ मेरा बचपन बहुत अच्छा नहीं बीता मेरी माँ साधारण गृहस्थ परिवार की थीं । घर परिवार की परिस्थिति कुछ ऐसी थी कि माँ को दिनभर खेतों में काम करना पड़ता था । माँ बताती थीं कि जब मैं बमुश्किल तीन माह का था , माँ मुझे भी खेतों पर ले जाया करती थीं । किसी खेत में फसलों के बीच लिटा कर खेती का काम करती थीं । मैं नन्हें नन्हें हाथ पाँव चला कर आसमान को छूने का प्रयास करता । कभी कभी उड़ते हुये पक्षियों को देखकर उनसे बातें करने लगता था । इन्हीं लहलहाती फसलों और हरे भरे पौधों एवं पेड़ों के बीच रहते हुए मैं लगभग चारवर्ष का हो गया था । अब गाँव के बच्चों के साथ खेलने चला जाया करता था । कभी कभी तो खाना खा रहा होता और यदि कोई गाँव का लड़का आ जाता तो मैं खाना छोड़कर खेलने चला जाता था । घर आने पर कभी कभार पिटाई भी हो जाती थी। मेरे भाई भाभी नहीं चाहते थे कि मैं पढ़ूँ। अत:वे तरह तरह के काम बता देते थे । किस खेत का "आर " छुड़ाना ( फेंकना ) है या कोन गोड़ना है . हरा चारा किस खेत से काटना है ……. सुबहका काम रात खाना खाते समय ही बता देते थे । गृहस्थ परिवार की थीं । घर परिवार की परिस्थिति कुछ ऐसी थी कि माँ को दिनभर खेतों में काम करना पड़ता था । माँ बताती थीं कि जब मैं बमुश्किल तीन माह का था , माँ मुझे भी खेतों पर ले जाया करती थीं । किसी खेत में फसलों के बीच लिटा कर खेती का काम करती थीं । मैं नन्हें नन्हें हाथ पाँव चला कर आसमान को छूने का प्रयास करता । कभी कभी उड़ते हुये पक्षियों को देखकर उनसे बातें करने लगता था । इन्हीं लहलहाती फसलों और हरे भरे पौधों एवं पेड़ों के बीच रहते हुए मैं लगभग चारवर्ष का हो गया था । अब गाँव के बच्चों के साथ खेलने चला जाया करता था । कभी कभी तो खाना खा रहा होता और यदि कोई गाँव का लड़का आ जाता तो मैं खाना छोड़कर खेलने चला जाता था । घर आने पर कभी कभार पिटाई भी हो जाती थी। मेरे भाई भाभी नहीं चाहते थे कि मैं पढ़ूँ। अत:वे तरह तरह के काम बता देते थे । किस खेत का "आर " छुड़ाना ( फेंकना ) है या कोन गोड़ना है . हरा चारा किस खेत से काटना है ……. सुबहका काम रात खाना खाते समय ही बता देते थे । मेरा बचपन बहुत अच्छा नहीं बीता मेरी माँ साधारण गृहस्थ परिवार की थीं । घर परिवार की परिस्थिति कुछ ऐसी थी कि माँ को दिनभर खेतों में काम करना पड़ता था । माँ बताती थीं कि जब मैं बमुश्किल तीन माह का था , माँ मुझे भी खेतों पर ले जाया करती थीं । किसी खेत में फसलों के बीच लिटा कर खेती का काम करती थीं । मैं नन्हें नन्हें हाथ पाँव चला कर आसमान को छूने का प्रयास करता । कभी कभी उड़ते हुये पक्षियों को देखकर उनसे बातें करने लगता था । इन्हीं लहलहाती फसलों और हरे भरे पौधों एवं पेड़ों के बीच रहते हुए मैं लगभग चारवर्ष का हो गया था । अब गाँव के बच्चों के साथ खेलने चला जाया करता था । कभी कभी तो खाना खा रहा होता और यदि कोई गाँव का लड़का आ जाता तो मैं खाना छोड़कर खेलने चला जाता था । घर आने पर कभी कभार पिटाई भी हो जाती थी। मेरे भाई भाभी नहीं चाहते थे कि मैं पढ़ूँ। अत:वे तरह तरह के काम बता देते थे । किस खेत का "आर " छुड़ाना ( फेंकना ) है या कोन गोड़ना है . हरा चारा किस खेत से काटना है ……. सुबहका काम रात खाना खाते समय ही बता देते थे । बचपन बहुत अच्छा नहीं बीता मेरी माँ साधारण गृहस्थ परिवार की थीं । घर परिवार की परिस्थिति कुछ ऐसी थी कि माँ को दिनभर खेतों में काम करना पड़ता था । माँ बताती थीं कि जब मैं बमुश्किल तीन माह का था , माँ मुझे भी खेतों पर ले जाया करती थीं । किसी खेत में फसलों के बीच लिटा कर खेती का काम करती थीं । मैं नन्हें नन्हें हाथ पाँव चला कर आसमान को छूने का प्रयास करता । कभी कभी उड़ते हुये पक्षियों को देखकर उनसे बातें करने लगता था । इन्हीं लहलहाती फसलों और हरे भरे पौधों एवं पेड़ों के बीच रहते हुए मैं लगभग चारवर्ष का हो गया था । अब गाँव के बच्चों के साथ खेलने चला जाया करता था । कभी कभी तो खाना खा रहा होता और यदि कोई गाँव का लड़का आ जाता तो मैं खाना छोड़कर खेलने चला जाता था । घर आने पर कभी कभार पिटाई भी हो जाती थी। मेरे भाई भाभी नहीं चाहते थे कि मैं पढ़ूँ। अत:वे तरह तरह के काम बता देते थे । किस खेत का "आर " छुड़ाना ( फेंकना ) है या कोन गोड़ना है . हरा चारा किस खेत से काटना है ……. सुबहका काम रात खाना खाते समय ही बता देते थे । बहुत अच्छा नहीं बीता मेरी माँ साधारण गृहस्थ परिवार की थीं । घर परिवार की परिस्थिति कुछ ऐसी थी कि माँ को दिनभर खेतों में काम करना पड़ता था । माँ बताती थीं कि जब मैं बमुश्किल तीन माह का था , माँ मुझे भी खेतों पर ले जाया करती थीं । किसी खेत में फसलों के बीच लिटा कर खेती का काम करती थीं । मैं नन्हें नन्हें हाथ पाँव चला कर आसमान को छूने का प्रयास करता । कभी कभी उड़ते हुये पक्षियों को देखकर उनसे बातें करने लगता था । इन्हीं लहलहाती फसलों और हरे भरे पौधों एवं पेड़ों के बीच रहते हुए मैं लगभग चारवर्ष का हो गया था । अब गाँव के बच्चों के साथ खेलने चला जाया करता था । कभी कभी तो खाना खा रहा होता और यदि कोई गाँव का लड़का आ जाता तो मैं खाना छोड़कर खेलने चला जाता था । घर आने पर कभी कभार पिटाई भी हो जाती थी। मेरे भाई भाभी नहीं चाहते थे कि मैं पढ़ूँ। अत:वे तरह तरह के काम बता देते थे । किस खेत का "आर " छुड़ाना ( फेंकना ) है या कोन गोड़ना है . हरा चारा किस खेत से काटना है ……. सुबहका काम रात खाना खाते समय ही बता देते थे । बचपन बहुत अच्छा नहीं बीता मेरी माँ साधारण गृहस्थ परिवार की थीं । घर परिवार की परिस्थिति कुछ ऐसी थी कि माँ को दिनभर खेतों में काम करना पड़ता था । माँ बताती थीं कि जब मैं बमुश्किल तीन माह का था , माँ मुझे भी खेतों पर ले जाया करती थीं । किसी खेत में फसलों के बीच लिटा कर खेती का काम करती थीं । मैं नन्हें नन्हें हाथ पाँव चला कर आसमान को छूने का प्रयास करता । कभी कभी उड़ते हुये पक्षियों को देखकर उनसे बातें करने लगता था । इन्हीं लहलहाती फसलों और हरे भरे पौधों एवं पेड़ों के बीच रहते हुए मैं लगभग चारवर्ष का हो गया था । अब गाँव के बच्चों के साथ खेलने चला जाया करता था । कभी कभी तो खाना खा रहा होता और यदि कोई गाँव का लड़का आ जाता तो मैं खाना छोड़कर खेलने चला जाता था । घर आने पर कभी कभार पिटाई भी हो जाती थी। मेरे भाई भाभी नहीं चाहते थे कि मैं पढ़ूँ। अत:वे तरह तरह के काम बता देते थे । किस खेत का "आर " छुड़ाना ( फेंकना ) है या कोन गोड़ना है . हरा चारा किस खेत से काटना है ……. सुबहका काम रात खाना खाते समय ही बता देते थे । बहुत अच्छा नहीं बीता मेरी माँ साधारण गृहस्थ परिवार की थीं । घर परिवार की परिस्थिति कुछ ऐसी थी कि माँ को दिनभर खेतों में काम करना पड़ता था । माँ बताती थीं कि जब मैं बमुश्किल तीन माह का था , माँ मुझे भी खेतों पर ले जाया करती थीं । किसी खेत में फसलों के बीच लिटा कर खेती का काम करती थीं । मैं नन्हें नन्हें हाथ पाँव चला कर आसमान को छूने का प्रयास करता । कभी कभी उड़ते हुये पक्षियों को देखकर उनसे बातें करने लगता था । इन्हीं लहलहाती फसलों और हरे भरे पौधों एवं पेड़ों के बीच रहते हुए मैं लगभग चारवर्ष 1का हो गया था । अब गाँव के बच्चों के साथ खेलने चला जाया करता था । कभी कभी तो खाना खा रहा होता और यदि कोई गाँव का लड़का आ जाता तो मैं खाना छोड़कर खेलने चला जाता था । घर आने पर कभी कभार पिटाई भी हो जाती थी। मेरे भाई भाभी नहीं चाहते थे कि मैं पढ़ूँ। अत:वे तरह तरह के काम बता देते थे । किस खेत का "आर " छुड़ाना ( फेंकना ) है या कोन गोड़ना है . हरा चारा किस खेत से काटना है ……. सुबहका काम रात खाना खाते समय ही बता देते थे ।
x xमेरा बचपन बहुत अच्छा नहीं बीता मेरी माँ साधारण गृहस्थ परिवार की थीं । घर परिवार की परिस्थिति कुछ ऐसी थी कि माँ को दिनभर खेतों में काम करना पड़ता था । माँ बताती थीं कि जब मैं बमुश्किल तीन माह का था , माँ मुझे भी खेतों पर ले जाया करती थीं । किसी खेत में फसलों के बीच लिटा कर खेती का काम करती थीं । मैं नन्हें नन्हें हाथ पाँव चला कर आसमान को छूने का प्रयास करता । कभी कभी उड़ते हुये पक्षियों को देखकर उनसे बातें करने लगता था । इन्हीं लहलहाती फसलों और हरे भरे पौधों एवं पेड़ों के बीच रहते हुए मैं लगभग चारवर्ष का हो गया था । अब गाँव के बच्चों के साथ खेलने चला जाया करता था । कभी कभी तो खाना खा रहा होता और यदि कोई गाँव का लड़का आ जाता तो मैं खाना छोड़कर खेलने चला जाता था । घर आने पर कभी कभार पिटाई भी हो जाती थी। मेरे भाई भाभी नहीं चाहते थे कि मैं पढ़ूँ। अत:वे तरह तरह के काम बता देते थे । किस खेत का "आर " छुड़ाना ( फेंकना ) है या कोन गोड़ना है . हरा चारा किस खेत से काटना है ……. सुबहका काम रात खाना खाते समय ही बता देते थे ।मेरा बचपन बहुत अच्छा नहीं बीता मेरी माँ साधारण गृहस्थ परिवार की थीं । घर परिवार की परिस्थिति कुछ ऐसी थी कि माँ को दिनभर खेतों में काम करना पड़ता था । माँ बताती थीं कि जब मैं बमुश्किल तीन माह का था , माँ मुझे भी खेतों पर ले जाया करती थीं । किसी खेत में फसलों के बीच लिटा कर खेती का काम करती थीं । मैं नन्हें नन्हें हाथ पाँव चला कर आसमान को छूने का प्रयास करता । कभी कभी उड़ते हुये पक्षियों को देखकर उनसे बातें करने लगता था । इन्हीं लहलहाती फसलों और हरे भरे पौधों एवं पेड़ों के बीच रहते हुए मैं लगभग चारवर्ष का हो गया था । अब गाँव के बच्चों के साथ खेलने चला जाया करता था । कभी कभी तो खाना खा रहा होता और यदि कोई गाँव का लड़का आ जाता तो मैं खाना छोड़कर खेलने चला जाता था । घर आने पर कभी कभार पिटाई भी हो जाती थी। मेरे भाई भाभी नहीं चाहते थे कि मैं पढ़ूँ। अत:वे तरह तरह के काम बता देते थे । किस खेत का "आर " छुड़ाना ( फेंकना ) है या कोन गोड़ना है . हरा चारा किस खेत से काटना है ……. सुबहका काम रात खाना खाते समय ही बता देते थे ।
